अब सामने आया है कि दीक्षा कार्यक्रम से दो दिन पूर्व तीन सितम्बर को पीपी को भाई बताने वाले हल्द्वानी निवासी शख्स ने अनुष्ठान के लिए कारागार प्रशासन को आवेदन किया था। वहीं, अगले ही दिन चार सितम्बर को पीपी को ब्लडप्रेशर की शिकायत पर हल्द्वानी अस्पताल ले जाना पड़ा।
अंडरवर्ल्ड डॉन प्रकाश पांडे उर्फ पीपी को कारागार में दीक्षा दिलाने का कनेक्शन हल्द्वानी के अस्पताल से जोड़ा जा रहा है। क्योंकि जिस दिन पीपी को अल्मोड़ा कारागार में दीक्षा दिलाई गई थी उसके एक दिन पहले पहले पीपी को बीपी के उपचार के लिए हल्द्वानी ले जाया गया था।
ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि कहीं पीपी की दीक्षा की पूरी कहानी हल्द्वानी के अस्पताल में तो नहीं बुनी गई। पांच सितम्बर को अपने आप को जूना अखाड़े का बताने वाले दो संतों ने कथित पड़ोसी के समक्ष अंडरवर्ल्ड डॉन पीपी को जेल में दीक्षा दिलाई और प्रेसवार्ता कर पीपी को कुछ मठों का उत्तराधिकारी घोषित कर दिया।
अब सामने आया है कि दीक्षा कार्यक्रम से दो दिन पूर्व तीन सितम्बर को पीपी को भाई बताने वाले हल्द्वानी निवासी शख्स ने अनुष्ठान के लिए कारागार प्रशासन को आवेदन किया था। वहीं, अगले ही दिन चार सितम्बर को पीपी को ब्लडप्रेशर की शिकायत पर हल्द्वानी अस्पताल ले जाना पड़ा।
पांच सितम्बर को हल्द्वानी में ही रहने वाले एक और शख्स ने पीपी को अपना पड़ोसी बताते हुए दो संतों ने साथ कारागार में दीक्षा दिला दी। तीनों घटनाओं के तार हल्द्वानी से जुड़ रहे हैं। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि कहीं पीपी को दीक्षा दिलाने की स्क्रिप्ट हल्द्वानी में तो नहीं लिखी गई।
कथित पड़ोसी सहित अन्य भी संदेह के घेरे में बाए
अंडरवर्ल्ड डॉन पीपी को दीक्षा दिलाने के साथ प्रेस वार्ता में कथित पड़ोसी भी मौजूद रहा। कथित पड़ोसी के अलावा अनुष्ठान की लिए अनुमति पत्र में सात अन्य लोग भी शामिल थे। इनमें से पांच कथित जूना अखाड़ा के थानापति राजेंद्र गिरी, महंत दीनदयाल गिरी, चंद्र कांत गिरी, सुरेंद्र गिरी, रसानंद सरस्वती शामिल रहे, जबकि दो अन्य स्थानीय लोगों की भूमिका भी रही। हालांकि वह दीक्षा के समय मौजूद नही थे।
जेल रिकार्ड में पीपी के कई नाम हैं दर्ज
अमूमन अंडरवर्ल्ड डॉन प्रकाश पांडे को उर्फ पीपी के नाम से जाना जाता है, लेकिन जेल रिकार्ड में पीपी के कई नाम दर्ज हैं। जिन नामों के बारे में अधिकांश लोग अब तक नहीं जानते हैं। रानीखेत के प्रकाश पांडे को उर्फ पीपी के अलावा उर्फ बंटी पांडे, उर्फ विजय सुभाष शर्मा, उर्फ आर्यन के नाम से भी जाना जाता रहा है। यानी अपराध की दुनिया में पीपी कई बार नाम बदलकर रहा है।
गौलापार के व्यक्ति ने मांगी थी अनुमति
जेल प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक अंडरवर्ल्ड डॉन पीपी को दीक्षा दिलाने के लिए अनुष्ठान की इजाजत हल्द्वानी गौलापार निवासी व्यक्ति ने मांगी थी। आवेदन पत्र में उसने कथित संतों सहित आठ लोगों के समक्ष दो घंटे का आंशिक अनुष्ठान करवाने की बात लिखी थी। हालांकि उस पत्र के जवाब में जेल प्रशासन ने अनुष्ठान की अनुमति नहीं दी

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